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हरू (हरज्यू) - सैम देवता की कहानी ,समृद्धि और सीमा के रक्षक देवता |

हरू (हरज्यू) - सैम देवता की कहानी ,समृद्धि और सीमा के रक्षक देवता, उत्तराखंड

【औन हरू हरपट, जौन हरू खड़पट 】


उत्तराखंड के कुमाऊं में प्रचलित इस लोकोक्ति का अर्थ है कि हरू (हरज्यू), आये हरियाली लाये, हरू (हरज्यू) जाये सब कुछ नष्ट हो जाये ।
हरू (हरज्यू) के साथ हमेशा सैम देवता के भी मंदिर होते हैं, हरू और सैम दोनों भाई हैं हरू और सैम के जीवन की गाथा ही हरू-सैम की जागरों में गायी जाती हैं।

हरू-सैम की जन्म कथा ।
बहुत साल पहले कि बात है निकन्दर नाम का एक राजा हुआ करता था। राजा निकन्दर की एक बेटी थी जिसका नाम कालानीरा था एक वर्ष जब हरिद्वार में कुंभ लगा तो कालानीरा ने अपने पिता से कुंभ में जाने की अनुमति मांगी पिता ने लंबी यात्रा में अकेली पुत्री को भेजने से मना कर दिया लेकिन बाद में कालानीरा की जिद्द के आगे पिता ने हार कर उसे अनुमति दे दी।

राजा निकन्दर ने अपनी पुत्री को अनुमति एक शर्त पर दी कि वह गंगा में डुबकी नहीं लगायेगी बल्कि घुटनों तक के पानी तक ही गंगा में जायेगी, कालानीरा ने पिता की बात को मान लिया और हरिद्वार के कुंभ में चली गयी ।

  मंदिर हरू (हरजु) देवता | कुमाऊँ | उत्तराखंड हरू (हरजु) देवता | कुमाऊँ | उत्तराखंड  
हरिद्वार के कुंभ में लाखों साधु-संन्यासी गंगा स्नान के लिए आये थे। कालानीरा ने एक कुटिया को गंगा के तट बनाया और अगली सुबह गंगा स्न्नान के लिये गयी पिता की आज्ञा अनुसार उसने घुटनों तक ही गंगा में अपने पैरों को डाला इतने सारे साधु-संन्यासियों को गंगा में डुबकी लगाता देख कालानीरा का मन भी गंगा में पूरी डुबकी लगाने का हुआ।

कालानीरा ने पिता की बात न मानते हुये गंगा में डुबकी लगा दी जैसे ही कालानीरा ने गंगा में डुबकी लगाई सूर्य की पहली किरणें भी गंगा नदी पर पड़ रही थी जैसे ही कालानीरा डुबकी लगाकर गंगा से बाहर निकली तो उसे आभास हुआ कि वह गर्भवती हो चुकी है। लोक-लज्जा के डर से कालानीरा बहुत भयभीत हो गयी और घर न लौटकर जंगलों की और चली गयी
जंगल में उसे गुरु गोरखनाथ बाबा तप करते हुये दिखे गुरु गोरखनाथ जिस स्थान पर तप कर रहे थे वहां की धूनी बुझ चुकी थी और पेड़-पौधे फूल सब कुछ सूख चुके थे। कालानीरा ने वहीं रहकर लकड़ियाँ एकत्र की और धूनी जला दी जल से सींच-सींच कर फुलवारी को हरा-भरा कर दिया जब गुरु गोरखनाथ बाबा की ने आंखें खोली तो वे अत्यंत प्रसन्न हुये और कालानीरा को वरदान मांगने को कहा कालानीरा ने गुरुगोरखनाथ बाबा से मृत्यु का वर मांगा।

हरजु देवता ke baare me kuch details  
कालानीरा के इस अजीब वरदान जो सुनकर गुरु गोरखनाथ ने उसका दुःख सुना और उसे वरदान दिया कि तुम्हारे सभी पुत्र पराक्रमी होंगे और देवताओं की तरह पूजे जायेंगे।

कुछ दिनों बाद कालानीरा की बाईं कोहनी से एक पुत्र का जन्म हुआ जिसे गुरु गोरखनाथ ने हरू (हरज्यू) का  नाम दिया कालानीरा अब गुरु गोरखनाथ बाबा के आश्रम में ही रहने लगी थी।
एक दिन की बात है कालानीरा स्नान के लिए नदी किनारे गयी और अपने पुत्र हरू को गुरु गोरखनाथ के आश्रम में रख दिया हरू अपनी माता की रक्षा के लिए माता के पीछे-पीछे चला गया नदी किनारे कालानीरा पर लटुवा मसान ने हमला कर दिया अपनी मां पर लटुवा मसान का हमला देख कर हरू को क्रोध आ गया ओर वो लटुवा मसान की गर्दन पर चढ़ गया और उसे मार दिया।

दूसरी तरफ आश्रम में हरू को न देख गुरु गोरखनाथ को लगा कि शायद बालक को किसी जंगली जानवर ने खा लिया है तब गुरु ने अपने तप से घास में प्राण फूंक कर एक बच्चे को जन्म दिया जब कालानीरा अपने पुत्र हरू के साथ आश्रम में आई तो दो-दो बालकों को देखकर चकित रह गयी ।
गुरु गोरखनाथ जी ने कालानीरा को सारी बात बताई और उसके बाद गुरु गोरखनाथ बाबा ने कालानीरा को आशीर्वाद दिया कि इनमें जो जन्म का ज्येष्ठ है वह हरु (हरज्यू) और जो कर्म का ज्येष्ठ होगा वह सैम देवता कहलायेगा और इस तरह सीमा के रक्षक और समृद्धि के देवता हरू (हरज्यू) सैम देवता का जन्म हुआ ।

गोलू देवता की सच्ची कहानी  
हरज्यू और सैम देवता एक साथ चलते है और उनके मंदिर भी एक साथ है। हरज्यू और सैम देवता की जागर कुमाऊँ में लगाई जाती है और इनकी जागर में हरज्यू-सैम की जन्म कथा के बारे में ही व्यथा सुनाई जाती है।
जय गुरु गोरखनाथ बाबा की जय।
जय हरज्यू देवता की जय 
जय सैम देवता की जय।
जय गोल्ज्यू देवता की जय।

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