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श्री चितई गोल्ज्यू चालीसा

श्री चितई गोल्ज्यू चालीसा

                गुरू वन्दना

बन्दउँ . गुरू पद रज करूँ मंजुल अंजन ।
सुमिरत दिव्य दृष्टि , दृग दोष विभंजन ।।
अमिअ मूरिमय जग प्रकाशक ज्ञानी ।
साधु चरित हिय वरसे सरसई वानी ।।
भैरव भक्ति ज्ञान गुरू जो मुझे दीन्हा ।।
अति अनन्य उपकार मो पर कीन्हा ।।
शत शत नमन मोहि दुख दोष दुरावा 
बंदनीय गुरू पद जेहि जग जस पावा ।।

हिंदी अनुवाद-
( गुरूदेव मैं चरणों की बन्दना करते हुए आपके चरणों की धूलि का काजल अपने आँखों में लगाऊ ताकि भगवान गोलज्यू के दिव्य दर्शन को प्राप्त करने के लिए दृष्टि दोष से मुक्त हो सकू । गुरूदेव आप मुझे ज्ञान के प्रकाश की संजीवनी के साथ मेरे हृदय में साधुवाद तथा मुख पर सरस्वती वाणी तथा मुझे भगवन गोलज्यु महाराज के भैरव रूप की भक्ति का ज्ञान का वैभव प्रदान कर महान उपकार किया है । हे दुख , बाधाओं तथा शत्रुता के विकारों का नाश करने वाले )

                     मंत्र
ऊँ नमो गौर भैरवाये च कलिंगानन्दनाय च
श्री बाला गौरिया च झालूराईसुताई च
शत्रु नाशकाय च परित्राणाय च 
महान्यायाधीशे च श्री ग्वेल देवाय नमः 

श्री चितई गोलज्यू चालीसा-

दो ० वीर प्रतापी न्यायविद , तुम्हारी जय जयकार । 
कष्ट हरो मंगल करो , झालूराई सुत हमार ।। 
विघ्न विनाशक शत्रुनाशक , तुम हो कृष्णावतार | 
रिद्वी सिद्वी के दाता , जग तारण ते अवतार ।।

चौपाई-

जय कलिंगापुत्र दूधाधारी । धार श्वेत वसन अश्व की सवारी ।।
खड्ग हस्त, शीश पाग वीराजे। कंठमाला मुख ते तेज साजे ।।
दीन हीन पर दृष्टि तुम्हारी । सुनो झालुराइ सुत अर्ज हमारी ।।
दूर सुदूर से भक्तजन आवें । तुम्हारे दर्शन से धन्य हो जावें ।।

जगत प्रसिद्ध है न्याय तुम्हारा आपने सभी अर्जो को स्वीकारा।
दीन हीन किसी भेष में पुकारे । सभी विवाद तुमने स्वीकारे ।।
तुम हमेशा भक्तन के हितकारी। सदा ही जय इष्टदेव तुम्हारी ।।
प्रखर न्याय के तुम हो महादेवा तन्मय भक्त करे भैरव की सेवा

याचियों के तुम न्याय प्रदाता आदि अन्नत के तुम हो विधाता।।
चमत्कारी है न्याय तुम्हारा । याची अभियुक्त सबने पुकारा ।।
सहज दण्ड अहसास कराया अनितियों से सदा मुक्ति दिलाया।
याची वादी का उद्धार जाये । दोनो इष्ट देव का परमपद पाये ।

डाना गोलज्यू दूत तुम्हारे । हर वाद दर्ज होता उनके द्वारे ।।
याचीयों का हर न्याय करावे । वादियों का भी शोक नसावे ।।
दीन हीन को न्याय की आशा। सदा शरण रखते अपने पासा।।
न्याय पाकर भक्त धन्य हो जाये जन्म जन्मों के ऋणी हो जाये।

जग प्रसिद्ध है न्याय तुम्हारा । राजा रंक सबने स्वीकारा ।। मनमुटाव द्वेष तुमने सुलझाए। जरजेवर जमीं के वाद निष्ठाए।।
मुझे भी है प्रभु तुमसे आशा । हुआ निर्भय मैं आपके पासा ।। कृपा दृष्टि अब ईतनी करना। चरण शरण सदा अपने रखना ।।

दुखों के नाशक तुम हो विधाता। धन सम्बृद्वी धान्य के दाता ।। राह अटके के तुम मात्र सहायी। भूले भटकों के प्रेरणा दायी ।।
दषा महादशा के कष्ट नसावें । जीवन में नवजोत जलावें ।। सच्चे भाव सेवा अर्पणकी जिसने प्रभु चरण सिद्ध पाई है उसने

दीप धूप कर जो सुमिरे हमेशा। ताते मिटे हैं सब विध्न कलेशा। कष्टहारी हो प्रभु मंगलकारी। सदा जय हो भैरव देव तुम्हारी ।। स्मरण मात्र होय जीवन सुखारे। जन्म सुफल होई आज हमारे। बडी आशा से भक्त शरण आवे। तेरे द्वारे मनवांछित फल पावे। 
दया के सागर कृपालु भगवन शीष झुका समर्पित तनमन धन। पा तेरी भक्ति मैं धन्य हो जाऊ। प्रभु छत्रछाया ते पलते जाऊ।। रक्षा करो इष्ट हे दीनदयाला । भक्तजनों के दयालु प्रतिपाला ।। तुझे अर्पण कुछ नही कर पाया । निस्वार्थ तुम्हारी छत्रछाया ।।

सत्य सनातन दुष्टों के संहारक । रक्षा करो जगत के प्रेम प्रचारक ।। 
रिद्धि सिद्धी भवसागर के दायक। कृपा करो हे मनोरथ अधिनायक।। 
निर्भय हूँ मैं प्रभु तेरी दया से। शत्रु नाश हो तेरी अधिपतिता से। सदा नाम मैं रदूँ तुम्हारा । बाला गोरिया तेरा सहारा ।। 

कर जोड विनती तुम प्रभु सुनना । दुर्गुणों को मेरे सदा तुम हरना ।। रोग शोक भय ताप को हरना। बुल बुद्धि धन धान्य तुम करना। दया करो हे इष्ट मैं लाचारी । तुम अन्नय महा न्यायकारी ।। 
युग संचालक को सहत्र प्रणाम चरण धूलिदो मुझे कृपानिधान।

सो० दुग्ध ते दूध पाणि ते पाणि , जग प्रसिद्व न्याय तेरा । 
न्याय द्वार दुजा सानी , कलियुग ते आज नहीं ।। 

         | जय जय जय ईष्टदेव |


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