Ads Top

उत्तराखंड में गंगा दशहरा द्वार पत्रक क्यों मनाया जाता हैं ?

उत्तराखंड में गंगा दशहरा द्वार पत्रक क्यों मनाया जाता हैं ?

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको अपनी इस पोस्ट में उत्तराखंड में गंगा दशहरा द्वार पत्रक क्यों मनाया जाता हैं। बतायेंगे।



उत्तराखंड के कुमाऊंनी व गढ़वाली मंडल में त्योहारों की अपनी लोकप्रियता और महत्व हैं। उत्तराखंड में लगभग हर महीने में कुछ न कुछ त्योहार तो होते रहते है। इन त्योहारों में कुछ न कुछ पौराणिक कथाएं भी जुड़ी हुई है। इन्हीं में से एक त्योहार है गंगा दशहरा द्वार पत्रक। जो पुरानी परम्परा एवं कुमाऊंनी संस्कृति से जुड़ी हुई है। गंगादशहरा पर्व के दिन दरवाजों के उपर गंगा दशहरा पत्रक लगाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। 

गंगा माँ के पृथ्वी पर आने की खुशी और अग्नि व भय से बचने के लिए गंगा दशहरा मनाया जाता है। इस गंगा दशहरा पत्रक को देने कुल ब्रह्माण आते है। गंगा दशहरा की प्रतिष्ठा कर अपने यजमान को देते है। यह पर्व जेष्ठ मास की दशमी शुक्ल पक्ष को मनाया जाता है। पंडित घर-घर जाकर गंगा दशहरा पत्र बाटते है। आज के आधुनिक युग में यह गंगा दशहरा पत्र बाजारों में आसानी से उपलब्ध हो जाता है। लेकिन पूर्व में पंडितों द्वारा खुद तैयार किया जाता था। एक चक्र बनाकर उसके अंदर विभिन्न रंगों व लक्ष्मी, गणेश जी, शिव पार्वती, ऊं आदि के चित्र बनाए जाते है।

पत्रक के गोल चक्र के अंदर एक श्लोक अगस्त्यश्च पुलस्त्यश्च वैशमपायनमेव व, जैमिनिश्च सुमन्तुश्च पंचैते वज्रवारका लिखा रहता है। पंडितों द्वारा जब गंगा दशहरा अपने यजमानों को दिया जाता है। बदले में दक्षिणा दी जाती है। पहले के समय में गंगा दशहरा पत्र के बदले में पंडित को अनाज दिया जाता था। गंगा माँ के धरती में आने के पर्व को पूरे देश मे मनाया जाता है। लेकिन गंगा दशहरा द्वार पत्र कुमाऊंनी क्षेत्रों में मनाया जाता हैं। इस दिन में दान करने से विशेष पुण्य लाभ प्राप्त होता हैं।

मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, अन्न दान, पितृ तर्पण, जप,तप, उपासना व उपवास किया जाता है। एक गंगा दशहरा लगाने से दस प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। शस्त्रों के अनुसार आज के दिन गंगा स्नान व गंगा पूजन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि द्वार पत्र लगाने से घर में अग्नि भय और आकाशीय बिजली का भय नहीं रहता है। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला गंगा दशहरा मुख्य रूप से जल संरक्षण का संदेश देने वाला पर्व है। यह जीव के जीवन में जल के महत्व को परिभाषित करता है। लोगों को नदियां, तालाब, पोखर को स्वच्छ और शुद्ध और स्वच्छ रखने की प्रेरणा और गंगा नदी के समान निरंतर कर्म पथ पर बढ़ते रहने की प्रेरणा भी देता है।

गंगा दशहरा पर्व पापनाशनी गंगा नदी के धरती पर अवतरण का वाहक है। सूर्यवंशी भगवान राम के वंशज राजा भगीरथ गंगा माँ को धरती पर लेकर आए थे। राजा सगर के पुत्रों को कपिल मुनि ने श्राप देकर भस्म कर दिया था। जिससे गंगा माँ के आगमन पर वो सब ठीक हो गए थे।

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी: केवल इस ब्लॉग का सदस्य टिप्पणी भेज सकता है.

Blogger द्वारा संचालित.